टेस्ट मैच की बनावट और खेल के चरण
टेस्ट क्रिकेट में दो टीमें अधिकतम पाँच दिन खेलती हैं और हर टीम को दो पारियाँ खेलने का मौका मिलता है। टॉस जीतने वाली टीम पहले बल्लेबाज़ी या गेंदबाज़ी चुनती है — यह फ़ैसला पिच की स्थिति, मौसम और टीम संरचना पर निर्भर करता है। तीसरे और चौथे दिन पिच का व्यवहार बदलने लगता है: स्पिन गेंदबाज़ों के लिए ज़मीन अनुकूल हो
जाती है और बल्लेबाज़ी कठिन। दिल्ली जैसे मैदानों पर उसका असर स्पष्ट देखा जाता है। फॉलो-ऑन, घोषणा और ड्रॉ जैसे पहलू टेस्ट को वनडे और T20 से अलग बनाते हैं।